बृहस्पति (गुरु) ग्रह शांति एवं पीतांबर पूजन: संपूर्ण शास्त्रीय विधि, महत्व एवं उज्जैन में अनुष्ठान रहस्य
१. अनुष्ठान की पृष्ठभूमि एवं शास्त्रोक्त महत्व
देवगुरु बृहस्पति नवग्रहों में सबसे शुभ और ज्ञान, विवेक, धर्म, धन, संतान एवं विवाह के अधिष्ठाता ग्रह हैं। जब कुंडली में गुरु नीच (मकर राशि), वक्री, अस्त या पापदृष्ट होते हैं, तो जातक के विवाह में भारी बाधाएं आती हैं, उच्च शिक्षा रुक जाती है, सही निर्णय नहीं हो पाते और समाज में मान-सम्मान घटता है। उज्जैन में देवगुरु की प्रसन्नता हेतु पीले वस्त्र, चने की दाल, हल्दी की गांठें, पीपल की समिधा एवं शुद्ध घी से वैदिक शांति संपन्न की जाती है।
बृहस्पति की कृपा के बिना मनुष्य का कोई भी आध्यात्मिक या भौतिक कार्य चिरस्थाई नहीं हो सकता।
२. पूजा का मूल उद्देश्य एवं प्राप्त होने वाले फल
विवाह में आने वाली बाधाओं की समाप्ति, शीघ्र विवाह योग, उच्च शिक्षा व प्रशासनिक परीक्षा में सफलता, संतान सुख।
३. सिद्ध वैदिक मंत्र एवं स्तोत्र
४. शास्त्रसम्मत पूजन विधि-विधान (क्रमबद्ध चरण)
1. शुद्धि संकल्प एवं गुरु वंदना
2. गुरु यंत्र एवं भगवान विष्णु का पंचामृत व केसर अभिषेक
3. चने की दाल, हल्दी की गांठें, पीले पुष्प व गुड़ अर्पण
4. वैदिक गुरु मंत्र एवं बृहस्पति गायत्री के 1008 जप
5. पीपल (अश्वत्थ) समिधा, पीली सरसों व घृत से 108 आहुति हवन
6. पीतांबर वस्त्र, पीतल का पात्र व धार्मिक पुस्तक दान
7. महाआरती एवं केसर तिलक धारण
५. आवश्यक पावन पूजन सामग्री
इस वैदिक अनुष्ठान में १००% शुद्ध एवं प्राकृतिक शास्त्रीय सामग्री का उपयोग किया जाता है: पीपल की समिधा (अश्वत्थ), चने की दाल, हल्दी की गांठें, पीला वस्त्र, केसर, शहद, शुद्ध घी, पीला चंदन, पंचामृत।।
६. वैदिक हवन एवं पूर्णाहुति विधान
पीपल वृक्ष की समिधा, पीली सरसों, शुद्ध घी एवं खीर से 108 आहुतियों का गुरु शांति हवन।
७. अवंतिका तीर्थ (उज्जैन) में अनुष्ठान का विशेष प्रभाव
महाकाल की पावन नगरी उज्जैन (अवंतिका) अनादि काल से मोक्ष और ग्रह शांति की तपोभूमि रही है। यह अनुष्ठान विशेष रूप से उज्जैन आश्रम / रामघाट तीर्थ पर वैदिक पुरोहितों द्वारा यजमान के नाम एवं गोत्र से संपन्न किया जाता है।
शुभ दिन एवं मुहूर्त: प्रत्येक गुरुवार, गुरु पुष्य योग, वैशाख मास। प्रातः 07:30 बजे से 11:30 बजे तक।
८. व्यक्तिगत संकल्प: साक्षात उपस्थिति अथवा लाइव वीडियो दर्शन
देश-विदेश के जो यजमान साक्षात उज्जैन आने में असमर्थ हैं, वे अपने नाम, गोत्र व नक्षत्र अनुसार लाइव ऑनलाइन संकल्प द्वारा भी इस अनुष्ठान को संपन्न करा सकते हैं। पूजनोपरांत अभिमंत्रित रक्षासूत्र, भस्म एवं महाप्रसाद डाक द्वारा यजमान के गृह पते पर प्रेषित किया जाता है।
पंडित बलराम व्यास
उज्जैन अवंतिका क्षेत्र के प्रतिष्ठित वैदिक पुरोहित। विगत 15+ वर्षों से श्री महाकालेश्वर, मंगलनाथ तीर्थ, सिद्धवट एवं रामघाट पर शास्त्रसम्मत विधि-विधान से कालसर्प दोष, मंगल भात पूजा, पितृ दोष शांति, महामृत्युंजय जप एवं संपूर्ण वैदिक अनुष्ठान संपन्न करा रहे हैं।
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