चंद्र ग्रह शांति एवं सोम याग: संपूर्ण शास्त्रीय विधि, महत्व एवं उज्जैन में अनुष्ठान रहस्य
१. अनुष्ठान की पृष्ठभूमि एवं शास्त्रोक्त महत्व
"चंद्रमा मनसो जातः" अर्थात चंद्रमा मन के स्वामी हैं। जब कुंडली में चंद्रमा नीच (वृश्चिक), केमद्रुम योग से ग्रस्त, अथवा राहु-केतु व शनि (विष योग) से पीड़ित होते हैं, तो व्यक्ति अत्यधिक भावुक, तनावग्रस्त, अनिद्रा व डिप्रेशन का शिकार हो जाता है। भगवान शिव ने चंद्रमा के क्षय रोग का निवारण कर उन्हें अपने मस्तक पर धारण किया था। उज्जैन के शिप्रा तट पर दूध, मिश्री, सफेद चंदन, पलाश समिधा व चांदी की वस्तु के दान से चंद्रमा की शुभता लौट आती है।
चंद्रमा मन का कारक है। चंद्र शांति से मन शांत, एकाग्र और प्रफुल्लित होता है, जिससे निर्णय क्षमता सुदृढ़ होती है।
२. पूजा का मूल उद्देश्य एवं प्राप्त होने वाले फल
मानसिक अवसाद, चिंता व अनिद्रा से मुक्ति, भावनात्मक संतुलन, माता के स्वास्थ्य में सुधार, जल व कफ विकारों की शांति।
३. सिद्ध वैदिक मंत्र एवं स्तोत्र
४. शास्त्रसम्मत पूजन विधि-विधान (क्रमबद्ध चरण)
1. संध्या शुद्धि एवं संकल्प
2. चंद्र यंत्र एवं शिवलिंग का दुग्धाभिषेक
3. सफेद चंदन, श्वेत पुष्प, अक्षत एवं मिश्री अर्पण
4. चंद्र बीज मंत्र एवं सोम स्तोत्र के 1008 जप
5. पलाश की समिधा, खीर एवं घृत से 108 आहुति हवन
6. चांदी का सिक्का, श्वेत वस्त्र, चावल व दूध का दान
7. महाआरती एवं चंद्र दर्शन अर्घ्य
५. आवश्यक पावन पूजन सामग्री
इस वैदिक अनुष्ठान में १००% शुद्ध एवं प्राकृतिक शास्त्रीय सामग्री का उपयोग किया जाता है: पलाश की समिधा, गाय का दूध, सफेद चंदन, चावल (अक्षत), मिश्री, खीर, सफेद वस्त्र, शुद्ध घी, कपूर।।
६. वैदिक हवन एवं पूर्णाहुति विधान
पलाश (ढाक) की समिधा, खीर एवं शुद्ध घी से 108 आहुतियों का सोम शांति हवन।
७. अवंतिका तीर्थ (उज्जैन) में अनुष्ठान का विशेष प्रभाव
महाकाल की पावन नगरी उज्जैन (अवंतिका) अनादि काल से मोक्ष और ग्रह शांति की तपोभूमि रही है। यह अनुष्ठान विशेष रूप से रामघाट (शिप्रा तट) / उज्जैन आश्रम पर वैदिक पुरोहितों द्वारा यजमान के नाम एवं गोत्र से संपन्न किया जाता है।
शुभ दिन एवं मुहूर्त: प्रत्येक सोमवार, पूर्णिमा, सोम प्रदोष, शरद पूर्णिमा। सायंकाल / चंद्रोदय काल 06:30 बजे से 09:00 बजे तक।
८. व्यक्तिगत संकल्प: साक्षात उपस्थिति अथवा लाइव वीडियो दर्शन
देश-विदेश के जो यजमान साक्षात उज्जैन आने में असमर्थ हैं, वे अपने नाम, गोत्र व नक्षत्र अनुसार लाइव ऑनलाइन संकल्प द्वारा भी इस अनुष्ठान को संपन्न करा सकते हैं। पूजनोपरांत अभिमंत्रित रक्षासूत्र, भस्म एवं महाप्रसाद डाक द्वारा यजमान के गृह पते पर प्रेषित किया जाता है।
पंडित बलराम व्यास
उज्जैन अवंतिका क्षेत्र के प्रतिष्ठित वैदिक पुरोहित। विगत 15+ वर्षों से श्री महाकालेश्वर, मंगलनाथ तीर्थ, सिद्धवट एवं रामघाट पर शास्त्रसम्मत विधि-विधान से कालसर्प दोष, मंगल भात पूजा, पितृ दोष शांति, महामृत्युंजय जप एवं संपूर्ण वैदिक अनुष्ठान संपन्न करा रहे हैं।
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