अक्षय तृतीया स्वर्ण लक्ष्मी एवं कुबेर महापूजन: संपूर्ण शास्त्रीय विधि, महत्व एवं उज्जैन में अनुष्ठान रहस्य
१. अनुष्ठान की पृष्ठभूमि एवं शास्त्रोक्त महत्व
अक्षय तृतीया एक ऐसा अबूझ मुहूर्त है जिसमें किया गया कोई भी शुभ कार्य, दान, जप और पूजन अक्षय (जिसका कभी क्षय न हो) फल प्रदान करता है। इस दिन भगवान परशुराम जी का प्राकट्य भी हुआ था और बद्रीनाथ धाम के कपाट भी खुलते हैं। स्वर्ण-चांदी और श्री यंत्र का पूजन धन वृद्धि कराता है।
२. पूजा का मूल उद्देश्य एवं प्राप्त होने वाले फल
अक्षय धन-धान्य की प्राप्ति, नवीन व्यवसाय आरंभ, स्थायी संपत्ति वृद्धि एवं दुर्भाग्य का नाश।
४. शास्त्रसम्मत पूजन विधि-विधान (क्रमबद्ध चरण)
1. मंगल कलश स्थापन व संकल्प
2. स्वर्ण/रजत आभूषण अथवा सिक्कों का पंचामृत स्नान
3. श्री यंत्र पर कुंकुम व कमल पुष्प अर्चन
4. कनकधारा स्तोत्र एवं श्री सूक्त पाठ
5. सत्तू, ककड़ी, जल पात्र एवं खरबूजा दान संकल्प
6. महालक्ष्मी आरती एवं महाप्रसाद
५. आवश्यक पावन पूजन सामग्री
इस वैदिक अनुष्ठान में १००% शुद्ध एवं प्राकृतिक शास्त्रीय सामग्री का उपयोग किया जाता है: कमल पुष्प, रोली, अक्षत, केसर, पीतांबर, शर्करा, सत्तू, मिट्टी का घड़ा (दान हेतु), स्वर्ण/चांदी का सिक्का एवं फल।।
७. अवंतिका तीर्थ (उज्जैन) में अनुष्ठान का विशेष प्रभाव
महाकाल की पावन नगरी उज्जैन (अवंतिका) अनादि काल से मोक्ष और ग्रह शांति की तपोभूमि रही है। यह अनुष्ठान विशेष रूप से Ujjain, Madhya Pradesh पर वैदिक पुरोहितों द्वारा यजमान के नाम एवं गोत्र से संपन्न किया जाता है।
८. व्यक्तिगत संकल्प: साक्षात उपस्थिति अथवा लाइव वीडियो दर्शन
देश-विदेश के जो यजमान साक्षात उज्जैन आने में असमर्थ हैं, वे अपने नाम, गोत्र व नक्षत्र अनुसार लाइव ऑनलाइन संकल्प द्वारा भी इस अनुष्ठान को संपन्न करा सकते हैं। पूजनोपरांत अभिमंत्रित रक्षासूत्र, भस्म एवं महाप्रसाद डाक द्वारा यजमान के गृह पते पर प्रेषित किया जाता है।
पंडित बलराम व्यास
उज्जैन अवंतिका क्षेत्र के प्रतिष्ठित वैदिक पुरोहित। विगत 15+ वर्षों से श्री महाकालेश्वर, मंगलनाथ तीर्थ, सिद्धवट एवं रामघाट पर शास्त्रसम्मत विधि-विधान से कालसर्प दोष, मंगल भात पूजा, पितृ दोष शांति, महामृत्युंजय जप एवं संपूर्ण वैदिक अनुष्ठान संपन्न करा रहे हैं।
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